
उस शख्स की बात सुनकर अभिनय ने उसे देखा और अपने कोल्ड और गहरी आवाज में जवाब दिया,"लगता है आप ठाकुर खानदान को नहीं जानते। ठाकुर खानदान के लोग कभी भी अपने चौखट पे आने वाले लोगों को निराश नहीं करते।"
ये कहते हुए अभिनय ने एक तरफ देखा जहां से कुछ लड़कियां महंगे वाइन कलेक्शन लेकर आए। और पास के खेत के मटन और चिकन बन रहे थे। क्योंकि नॉनवेज ठाकुर खानदान के हवेली के अंदर नहीं बनता था। सभी लोग ये देख कर खुश हो गए।
उस मंत्री का मुंह भी बंद हो गया था। ये देख कर यशराज ठाकुर अभिनय के कंधे पर टैप करते हैं। और दोनों वहां से बाहर निकल जाते हैं।
रात के 8 बज गए थे।
और ठाकुर हवेली के बड़े से गार्डन में सुंदर सा मंडप बना हुआ था। मंडप ताजे फूलों से बनाया गया था। जिसकी खुशबू आसपास के माहौल को और मनमोहक बना रही थी।
मंडप के अंदर पंडित जी सारी सामग्री को सजा रहे थे। जिसे सजाने के बाद उन्होंने पास खड़े यशराज जो को देखते हुए बोले," ठाकुर साहब दूल्हे को मंडप पे ले आए। अब मुहूर्त का समय हो गया हैं। वर पूजा स्टार्ट करनी हैं।"
पंडित जी को बात सुनकर यशराज के माथे पर बल पर गए। फिर उन्होंने किसी को कॉल किया। तभी पूरे गार्डन में हलचल की आवाज आने लगी और सब शौक नज़रो से हवेली से बाहर आ रहे चार लड़कों देख रहे थे।
सब से ज्यादा शौक तो उन्हें उन तीन लड़कों के बीच आते हुए दूल्हे को देख कर लग था। उन सब के दिमाग में सिर्फ एक ही बात चल रही थी,"क्या वो लोग शशांक ठाकुर के शादी में नहीं आए थे? और अगर हा! तो दूल्हे के जोड़े में अभिनय ठाकुर क्यों हैं?"
वही अभिनय को दूल्हे के लिबाज में देखकर यशराज ठाकुर के चेहरे पर भी एक मुस्कुराहट आ गई। उनके कान में एक आवाज गूंजी,"भगवान ने इन दोनों का मिलना लिखा है। तो ये किसी ना किसी विधि जरूर एक होंगे। ठाकुर साहब!" ये बात सालों पहले उनके कुलगुरु ने कहा था।
और आज ये बात आज सच हो रही थी। वो भी शशांक की वजह से। शशांक का ख्याल आते ही उनका चेहरा काला हो गया। और वो कुछ घंटों पहले के ख्यालो में खो गए।
फ्लैशबैक
अभिनय और यशराज दोनों उस पुरुष मंडली के गैंग से निकल कर शशांक के रूम की तरफ चल पड़ते हैं। जब वो शशांक के रूम के पास पहुंचते हैं तो देखते हैं उसका गेट बंद था और बहुत से लोग उस रूम के बाहर खड़े थे।
यशराज जी अभिनय को देखते हुए बोले,"ये सारे लोग दूल्हे के grooming के लिय आये हुए थे। लेकिन वो सब बाहर क्यों खड़े हैं?"
अभिनय ने कुछ नहीं कहा लेकिन सामने खड़े ब्यूटिशियन में से एक बोला," सर हम आधे घंटे से यहां खड़े हैं लेकिन अंदर से किसी ने गेट नहीं खोला।।"
ये सुनकर दोनों बाप बेटे ने एक दूसरे को देखा और एक नौकर की तरफ देखा वो एक masterkey ले आया। अभिनय ने उससे चाभियों का गुच्छा लिया और शशांक का रूम खोला। रूम खुलते ही दोनों बाप बेटे कमरे के अंदर घुस गए।
कमरा पूरी तरह अंधेरो से भरा था। यशराज जी के लाइट ऑन किया। शशांक रूम में कही नहीं था। अभिनय ने बाल्कनी में देखा और यशराज जी ने washroom चेक किया। वो कही नहीं था।
"मेहमान कुछ घंटों में आने लगेंगे और ये लड़का पता नहीं कहां गया।" यशराज जी टेंशन में अपने सर को सहलाते हुए बोले।
अभिनय जो चारों तरफ देख रहा था उसकी नज़र टेबल पर रखे एक कागज के टुकड़े पे गई। और उसकी आंखें छोटी हो गई। उसने जाकर वो कागज उठा लिया और देखा उस पर कुछ लिखा हुआ था।
"सॉरी डैड, पर मैं ये शादी नहीं कर सकता। जिस लड़की को मैने कभी देखा नहीं उससे मैं भला कैसे शादी कर सकता हूं। माना कि आपने मुझे पाल कर मुझपे बहुत बड़ा एहसान किया हैं इसका मतलब ये नहीं इतना बड़ा फैसल आप मुझसे बिना पूछे ले लेंगे। मुझे अपने लाइफ में कुछ करना हैं और अपने स्टैंडर्ड की लड़की से शादी करूंगा। मैं जा रहा हूं। और जब तक मैं कुछ अच्छा नहीं कर लेता मैं वापस नहीं आऊंगा।"
अभिनय ने अपने बगल में देखा जहां यशराज जी खड़े थे और उनकी नज़रे उस पेपर पे लिखे शब्दों पर टिकी थी। कुछ पल बाद वो सोफे पर जाकर बैठ गए। पांच मिनट तक कमरे में पूरा सन्नाटा पसरा हुआ था। अभिनय भी उन्हें ही देख रहा था और उसे आगे क्या होने वाला है इसका अंदाज़ा उसे हो गया था। जिसे सोच कर उसके हाथों को मुट्ठी कस के बंद हो गई।
और उसके नजरों के सामने एक लड़की का चेहरा आ गया। और उसने अपनी आँखें बंद कर ली। वो यशराज जी के शब्दों से होश में आया।
" अभिनय तुम्हें ये शादी करनी होगी। मैं जानता हूं तुमने पहले ही कहा था कि तुम अभी शादी नहीं करना चाहते लेकिन अब ये बात खानदान के इज्जत पे आ गया हैं।
कृतिका बहुत अच्छी लड़की हैं। तुम्हें उससे शादी करनी होगी। मैं नीचे जा रहा हूं अब मेरे सालों पहले किए गए वादे को पूरा करना तुम्हारे हाथों में है।" कहते हुए यशराज जी बिना अभिनय की कोई बात सुने कमरे से बाहर निकल गए।
फ्लैशबैक एंड


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