बिहार (बेगूसराय)
एक हवेली जो रंगबिरंगी लाइट और फूलों से सजा हुआ था। जिसकी चमक पूरे शहर में फैली हुई थी। पटाखो की आवाज इतनी तेज़ कि कई किलोमीटर तक उसकी आवाज गूंज रही थी। उस हवेली से दूर छोटे छोटे घरों से छोटे बच्चे आसमान में फूट रहे पटाखों को देख के खुश हो रहे थे।
और इतना धूम धड़ाका हो भी क्यों ना? आज यशराज ठाकुर के छोटे बेटे शशांक ठाकुर की शादी थी। इस पीढ़ी की पहली शादी! जिसकी खुशी में पूरे गांव को खाना कपड़े और बड़े बड़े तोहफे बांटे गए थे। यशराज ठाकुर ने पूरे दिल और जान से इस शादी पर पैसे खर्च किए थे।
जहां एक तरफ शादी की पूरी तैयारियां चल रही वही उसी हवेली के दूसरी तरफ अलग ही प्रोग्राम चल रहा था। वहां कुछ लड़कियां डांस कर रही थी। तो बहुत से मर्द शराब की बोतले खोल के बैठे थे। जिसके साथ वो यशराज ठाकुर को बहुत बहुत बधाई दे रहे थे। तभी बलराज ने यशराज के कंधे पर मारते हुए कहा जो उसका जिगरी दोस्त था,
"यश तेरी किस्मत तो सच में भगवान ने सोने की कलम से लिखी हैं। अब तुम्ही बताओ जिस विधायक की कुर्सी के लिए तुम ना जाने कितने दिनों से हाथ पैर मार रहे थे। अभिनय ने कितनी आसानी से तुम्हे इलेक्शन जितवा दिया। और दूसरी तरफ तुम्हारे दूसरे बेटे ने शादी करने का फैसला लेके तुम्हारे घर में एक लक्ष्मी की कमी पूरी कर दिया।"
तभी वहां बैठे एक आदमी ने हंसते हुए कहा,"हां बात तो सही है यश! राधिका भाभी तो अभी के होने के बाद ही चल बसी। कितने प्यार से उन्होंने तुम्हारे घर को संभाला था। लेकिन उनके जाने के बाद तो उस घर से जैसे देवी का वास उठ गया हो।"
उस आदमी की बात सुनकर बलराज ने कहा,"लेकिन इसमें गलती भी तो इसी की है कितनी ही उम्र थी इसकी सिर्फ 19 साल में बाप बन गया था। उस समय में इतनी जल्दी शादी हो जाया करती थी। लेकिन इसने रट लगा रखी थी कि ये दूसरी शादी करके अपने बेटे को किसी सौतेली माँ को नहीं सौंपेगा।
यश मैं कहता हूं तुम अभी भी शादी कर सकते हो। क्या जी उम्र है तुम्हारी सिर्फ 43 साल। पिछले महीने ही काली सिंह के 46 साल में किसी कम उम्र की लड़की से शादी की हैं।"
चुप करो तुम लोग। कैसी बातें कर रहे हो? आज मेरे बेटे की शादी हैं। वैसे ख्वाहिश तो अभिनय के शादी की थी। मुझे तो अभी भी कृति अपने अभी के लिए पसंद हैं। लेकिन उसे तो शादी से ही चिढ़ हैं। 24 साल का हो गया है लेकिन शादी नहीं करना चाहता।" यशराज ने अपने दोस्तों को चुप करवाते हुए कहा और फिर थोड़ा निराश होते हुए बोले,
"मैंने कृति के दादा को वादा किया था। कि वो जब 18 की होगी मैं उसकी शादी अपने बेटे से करवा उसे उन कमीनो से बचा लूंगा। इसलिए मुझे उसकी शादी अपने छोटे बेटे कबीर से तय करनी पड़ी।"
इसमें कौन से बड़ी बात है, हमारे अभिनय के लिए तो बहुत सी लड़कियां मिलेंगी। वैसे भी ये शादी इतनी जल्दबाजी में हो रही हैं। तुम्हारे सिवा लड़की को किसी ने देखा भी नहीं हैं।" बलराज ने कहा लेकिन उसके दिमाग में सिर्फ अपनी बेटी की शादी अभिनय से करने की सोच रखी थी।
ये कुछ लोग अंदर की तरफ बाते कर रहे थे। और बाहर नाच गाना चल रहा था। तभी उन्होंने एक दम शांति महसूस की तो एक दूसरे का चेहरा देख बाहर निकले। तो उन्हें दरवाजे से जूते की टक टक की आवाज सुनाई दी।
जिससे हॉल में खड़े सबकी नज़रे दरवाजे की ओर मुर गई। जहां से एक बहुत ही हैंडसम शख्स अंदर आ रहा था। उस शख्स ने एक काला कुर्ता पैजामा पहना हुआ था। उसने कुर्ते की स्लीव्स को half फोल्ड कर रखा था। उसका जौ लाइन शार्प था।
उसके चेहरे पे कठोर भाव थे। उसके आस पास एक ठंडा औरा था। उसके हाथों के नशे साफ साफ दिखाई दे रहे थे। उसके होठ हल्के काले और डार्क थे। जो बहुत attractive लग रहे थे। जिसे देख वो लड़कियां जो यहां डांस करके सबका मनोरंजन कर रहे थे। वो भी lust भरी नजरों से उस शख्स को देख रही थी।
लेकिन उस शख्स ने उनकी तरफ एक नजर भी नहीं देखा। वो सीधा यशराज के पास गया। जिसे देख बलराज ने कहा,"बेटा तुम आ गए। आज जो मांगना है माँगो, आखिर तुमने इलेक्शन जीत ही लिया। आगर तुम cm की कुर्सी के लिये लड़ो तो तुम तो वो भी जीत लोगे।"
"अभिनय, मेरा गुरूर, मेरा बेटा तुम आ गए। चलो मेरे साथ शाम होने वाला हैं। अब तक कबीर तैयार हो गया होगा तो उसे देखते हैं। शादी का मुहूर्त होने वाला है।" यशराज ने अभिनय के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा।
"अरे इतनी जल्दी कहां जा रहे हैं, ठाकुर साहब? MLA की सीट जीतने की खुशी में इतना ठंडा इंतजाम!" दुसरे पार्टी के एक शख्स ने कहा।
उसकी बात सुनकर अभिनय ने उसे घूर कर देखा और ठंडे आवाज में बोला।


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